Exclusive: पैंगोंग फ्लैश प्वाइंट को ‘सेमी-परमानेंट फेस-ऑफ’ के तौर पर डील कर रही है भारतीय सेना – Army dealing with pangong flashpoint as semi permanent face off

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  • चीन से लगी सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई
  • किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है सेना

लद्दाख के पैंगोंग झील में फ्लैश प्वाइंट को भारतीय सेना एक ‘सेमी-परमानेंट फेस-ऑफ’ के तौर पर डील कर रही है. सेना की उम्मीद के मुताबिक ये स्थिति महीनों नहीं तो हफ्तों तक खिंच सकती है. भव्य पैंगोंग झील के किनारे की मौजूदा स्थिति को लेकर सैन्य नेतृत्व कैसे देख रहा है, इस पर पहली बार इंडिया टुडे से जानकारी साझा करते हुए टॉप सेना अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना को पर्याप्त से अधिक मोबलाइज किया गया है जिससे कि सेक्टर में किसी भी स्थिति से निपटा जा सके. सेक्टर में चीन का बड़ा बिल्ड-अप अधिक साफ दिखता है.

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने इस हफ्ते दो दिन लद्दाख में बिताए. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पूर्वी लद्दाख में 832 किलोमीटर लंबे फ्रंटियर पर चीनी सेना के साथ स्थिति की जानकारी दी. लद्दाख में सेना प्रमुख पैंगोंग क्षेत्र में तैनात यूनिट्स के सैनिकों से मिले. इनमें वो जवान भी शामिल थे जिनका 5 मई की रात को चीनी सैनिकों के साथ हिंसक टकराव हुआ था. उस घटना से ही मौजूदा गतिरोध शुरू हुआ जिसे अब 51 दिन बीत चुके हैं.

जबकि भारतीय सेना पैंगोंग सेक्टर में चीनी कार्रवाइयों को पूर्वी लद्दाख में यथास्थिति बदलने की अधिक साफ दिखाई देने वाली कोशिश के तौर पर ले रही है, सूत्रों का कहना है कि आंतरिक तौर पर इसे डोकलाम गतिरोध के समांतर देखा जा रहा है, जो 70 से अधिक दिन चला था.

भारतीय सेना को उम्मीद है कि चीनी वापस लौट जाएंगे, लेकिन उसका दृष्टिकोण जल्दी तनाव घट जाने जैसी किसी संभावना को लेकर यथार्थवादी है. इंडिया टुडे हालांकि इस बात की पुष्टि कर सकता है कि 22 जून को चुशुल-मोल्डो में कोर कमांडर स्तर की बैठक के बाद रिज-लाइन पोजीशन पर चीनी सैनिकों की तैनाती में ‘थोड़ी किंतु दिखने वाली’ कमी आई है. जिस जगह ये बैठक हुई थी वो फिंगर 4 फेस-ऑफ प्वाइंट से दक्षिण में 20 किलोमीटर की दूरी पर है.

सेना इस तरह चीनी सैनिकों की संख्या में कमी को किसी माइलस्टोन की तरह नहीं ले रही है बल्कि 22 जून की बैठक में हुई सहमति के आधार पर उठाए एक कदम के तौर पर देख रही है.

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पिछले 10 दिनों में सैटेलाइट तस्वीरों और उनके विश्लेषण ने स्थापित किया है कि फिंगर 4 की रिज-लाइन के साथ न केवल चीनी तंबू और कैम्प बल्कि पिलबॉक्स (हथियारों के स्थाई बंकर्स), सुरक्षा पटरियां भी उभर आई हैं. सेना के सूत्रों ने कहा कि उन्होंने रिजलाइन पर संगर्स (छाती की ऊंचाई तक सुरक्षा दीवार) की मौजूदगी पर गौर किया है. वीडियो साक्षात्कार में, इंडिया टुडे ने उस विश्लेषक से बात की, जिसने पैंगोंग त्सो के फिंगर 4 में चीनी तैनाती की प्रकृति को कैप्चर करने वाली सैटेलाइट तस्वीरों को पहली बार प्रकाशित किया था.

shiv2_062620093548.jpgक्रेडिट- Orion_Int

इस हफ्ते की तस्वीरों के विश्लेषण ने रिज-लाइन के पीछे के क्षेत्रों में, और साथ ही झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सपोर्ट पोजीशंस का पता लगाया.

‘भारतीय सेना पैंगोंग झील में चीनियों के जवाब में पर्याप्त रूप से मोबलाइज नहीं हुई और उसने उस क्षेत्र में जमीनी पहुंच खो दी, जहां वो पहले पेट्रोल करती थी’? इस ‘अवधारणा’ को लेकर ग्राउंड पर सेना के सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट की. सूत्रों ने कहा, “वास्तविकता ये है कि सेना ‘किसी भी स्थिति का सामना करने’ के लिए पर्याप्त रूप से मोबलाइज हुई है, इसमें फिंगर 4 रिज-लाइन के पास का भी क्षेत्र है. यह तब है जबकि ये क्षेत्र सामान्य बार्डर मैनेजमेंट मुद्रा के हिस्से तौर पर भारतीय सेना की भारी तैनाती नहीं देखता है.”

सूत्रों ने बताया कि ‘मोबिलाइजेशन इस तरह किया गया है कि चीनी किसी भी दिशा से तनाव बढ़ाने की सीढ़ी पकड़ें, वहीं भारतीय सेना की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके.’

न सिर्फ रिज-लाइन के दो किलोमीटर पश्चिम में स्थित ITBP कैम्प को मजबूत किया गया है बल्कि भारतीय सेना ने रिजलाइन के पश्चिम में एक नई पोजीशन भी सेटअप की है. सेना ने इसे ‘फेस-ऑफ मौजूदगी’ बताया है. दरअसल 17-18 मई से इस क्षेत्र में चीनी कैंप दिखने शुरू हो गए थे. चीनी रिज-लाइन पोजीशंस अब भारतीय पोजीशंस से आधे किलोमीटर से कम की दूरी पर सीधे नजर आती है.

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चिंता का एक कारण यह भी है कि पैंगोंग झील में चीजें पहले से ही अस्थिर हैं. 5-6 मई को टकराव के दौरान दोनों पक्षों में कई लोग घायल हुए. इसके बाद 14 मई और फिर 31 मई को सैनिकों में झड़प हुई. 31 मई की घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वहीं शांति बनाए रखने के लिए कोशिशें जारी हैं.

सेना का आकलन साफ है कि इसका मौजूदा मिरर मोबिलाइजेशन और तैनाती किसी भी आकस्मिकता से निपटने के लिए पर्याप्त है. इस आकस्मिकता में स्थानीय स्तर पर झड़प की संभावना भी शामिल है. कम से कम दो पूर्व सेना प्रमुख – जनरल वीपी मलिक और जनरल दीपक कपूर – इसे एक संभावना के रूप में देखते हैं. ऐसी स्थिति में जब चीन ने 22 जून को सैनिकों की तैनाती में हल्की कमी लाने से पहले लगातार बिल्ड-अप किया.

सोशल मीडिया पर गुरुवार को सितंबर 2019 का एक वीडियो सामने आया जिसके फिंगर 4-8 के बीच पैंगोंग झील के तट से होने की पुष्टि हुई. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक चीनी पेट्रोल को भारतीय सेना के एक दल की ओर से चुनौती दी गई और रोका गया. बताया जा रहा है कि ये वीडियो जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और लद्दाख सहित दो नए केंद्र शासित प्रदेशों के निर्माण के कुछ ही हफ्तों के बाद का है.

हालांकि, पेट्रोलिंग टकराव वर्षों से होते रहे हैं, लेकिन इस वीडियो में देखा जा सकता है कि चीनी किस तरह सामान्य से अधिक सैनिकों और यूटिलिटी वाहनों के जरिए ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. सबसे गौर करने लायक हिस्सा वो है जिसमें चीनी नौकाएं उकसाने वाली मुद्रा में दिखती है.

जबकि इंडिया टुडे ने देपसांग और दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) क्षेत्रों में चीनी मोबिलाइजेशन पर रिपोर्ट दी है, असल में सेना वहां के घटनाक्रमों को मौजूदा गतिरोध से अलग देख रही है, जो पैंगोंग-हॉट स्प्रिंग्स-गलवान तक सीमित है. सेना के सूत्रों का कहना है कि देपसांग-डीबीओ के घटनाक्रम को चीन की ओर से क्षेत्र में मोबिलाइजेशन के लिए वर्षों की कोशिशों के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, ऐसी कोशिशें जिसे भारतीय सेना के अग्रिम मोबिलाइजेशन से नाकाम किया जाता रहा है.

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इंडिया टुडे की जानकारी में है कि क्षेत्र में पेट्रोलिंग अतिक्रमण दोनों पक्षों से होते हैं, हालांकि एलएसी के भारतीय पक्ष की तरफ चीन की कोई पोजीशन्स सामने नही आई हैं.यह इलाका संवेदनशील बना हुआ है, भारतीय वायु सेना की ओर से लेह से लेकर डीबीओ तक एयर ब्रिज की पहले ही स्थापना की जा रही है जिससे कि जरूरत पड़ने पर शॉर्ट नोटिस पर बड़ी संख्या में सैनिकों को पहुंचाया जा सके.

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