33 साल पुराना भयावह रिकॉर्ड छूने जा रही है बूढ़ी गंडक, 1987 की प्रलंयकारी बाढ़ याद कर दहशत में लोग | muzaffarpur – News in Hindi

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33 साल पुराना भयावह रिकॉर्ड छूने जा रही है बूढ़ी गंडक, 1987 की प्रलंयकारी बाढ़ याद कर दहशत में लोग

मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक उफान पर.

मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती नदी की बाढ़ की वजह से जिले के 13 प्रखंडों के 203 पंचायत की करीब 12 लाख की आबादी प्रभावित हुई है.

मुजफ्फरपुर. लगातार एक सप्ताह से बूढ़ी गंडक नदी (Budhi Gandak River) मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और इसका जलस्तर 1987 के खतरनाक जल स्तर से महज 38 सेंटीमीटर नीचे रह गई है. 1987 में आई बाढ़ में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर 54 मीटर 29 सेंटीमीटर था. जबकि वर्तमान में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर 53 मीटर 91 सेंटीमीटर हो गया है. इसके साथ ही नदी का पानी नये इलाकों में फैलता ही जा रहा है.  2017 की बाढ़ में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर जिस स्तर पर पहुंचा था उसको बूढ़ी गंडक इस बार पार कर गई है. अब लोगों को 1987 के बूढ़ी गंडक के खतरनाक स्तर की याद सता रही है.

12 लाख की आबादी प्रभावित
मुजफ्फरपुर में गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती नदी की बाढ़ की वजह से जिले के 13 प्रखंडों के 203 पंचायत की करीब 12 लाख की आबादी प्रभावित हुई है. इसमें से दो प्रखंड औराई और गायघाट पूरी तरह बाढ़ की चपेट में है. औराई और गायघाट में बागमती नदी के बाढ़ का पानी घरों तक पहुंचा है. लोगों को आवागमन से लेकर खाने पीने की समस्या हो रही है. जबकि बूढ़ी गंडक नदी का पानी रोजाना नए नए इलाकों में फैलता ही जा रहा है.

बांधों पर बना है  दबावनदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर बूढ़ी गंडक नदी में कई जगहों पर पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है. मोतीपुर और कांटी इलाके के अलावा मुसहरी और मीनापुर क्षेत्र में भी बूढ़ी गंडक नदी के बांध पर दबाव बना हुआ है. पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने मोतीपुर में बांध की मरम्मती का काम तेज कर दिया है. जल संसाधन विभाग ने कमजोर तटबंध के पास रेत भरे बोरे को जमा करना शुरू कर दिया है.

शुरू किया गया राहत कार्य
नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिया है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक किचन चलाकर दो वक्त का भोजन बाढ़ पीड़ितों को उपलब्ध कराया जा रहा है. साथ ही आवागमन के लिए सरकारी नाव के अलावा निजी नाव को भी उतारा गया है. जिले की बड़ी आबादी नाव से आवागमन को मजबूर है. कटरा प्रखंड मुख्यालय का जिला मुख्यालय से संपर्क भी भंग हो गया है.





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